Wednesday 16th 2014 April
इस संसदीय क्षेत्र में लोग मोदी को नहीं जानते...»
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर के आदिवासी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को नहीं जानते वे बलीदादा को जानते है और उनके नाम पर ही वोट मांगा जा रहा है। बस्तर के आदिवासियों के लिए प्रधानमंत्री का पद और नरेन्द्र मोदी दोनों महत्वहीन है। वे जानते हैं तो सिर्फ स्वर्गीय बलीराम कश्यप को जिनके पुत्र बस्तर से भाजपा प्रत्याशी दिनेश कश्यप है। यही वजह है कि यहां वोट बलीदादा के नाम पर मांगा जा रहा है मोदी के नाम पर नहीं। बस्तर क्षेत्र के पूर्व सांसद स्व. बलीराम कश्यप के निकट सहयोगी रहे वरिष्ट भाजपा नेता कमलेश ठाकुर ने बताया कि यहां गांव-गांव में बलीदादा के नाम पर वोट मांगा जा रहा है और कहा जा रहा है कि उनके बेटे दिनेश कश्यप उनके सपनों को और उनके अधूरे काम को पूरा करेंगे। स्व. बलीराम कश्यप का नाम बस्तर में जन-जन की जुबान पर आज भी बसा हुआ है। उनके द्वारा उठाए गए जनहित कारी कदमों तथा विकास कार्यों को जगह-जगह प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। वह आज भी लोकप्रिय है आदिवासियों के बीच। आदिवासी नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम का भी कहना है कि बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों में बलीराम कश्यप लोकप्रिय रहे और उन्होंने आदिवासियों के बीच अपनी जबरदस्त पकड़ बनाई थी।

रसीले अंगूर : गर्मियों में कूल-कूल'»

गर्मी का मौसम आ गया है। इन दिनों रसीले फल अंगूर की आवक बड़ी मात्रा में हो रही है। फलों में अंगूर सर्वोत्तम माना जाता है। यह एक बलवर्धक एवं सौन्दर्यवर्धक फल है। इसमें मां के दूध के समान पोषक तत्व पाए जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से अंगूर के कई फायदे हैं। - अंगूर के नन्हे-नन्हे दानों में पॉली-फेनोलिक फाइटोकेमिकल कंपाउंड पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को न केवल कैंसर से, बल्कि कोरोनरी हार्ट डिजीज, नर्व डिजीज, अल्जाइमर व वाइरल तथा फंगल इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं।

- अंगूर में सीमित मात्रा में कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, सोडियम, फाइबर, विटामिन ए, सी, ई व के, कैल्शियम, कॉपर, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक और आयरन भी मिलता है। शरीर के किसी भी भाग से रक्त स्राव होने पर अंगूर के एक गिलास ज्यूस में दो चम्मच शहद घोलकर पिलाने पर रक्त की कमी को पूरा किया जा सकता है जिसकी रक्तस्राव के समय क्षति हुई है।

फिर उगने के लिए डूबे ये सूरज»

ये महज संयोग है या कुछ और लेकिन 8 दिसंबर 2013 को जब आम आदमी पार्टी के दफ़्तर की खिड़की से अरविन्द केजरीवाल हाथ में माइक थामे नीचे खड़े समर्थकों को संबोधित कर रहे थे तो उन पर फूल बरस रहे थे। आज 14 फरवरी 2014 को जब वो दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी के उसी दफ़्तर की उसी खिड़की से नीचे खड़ी भीड़ को संबोधित कर रहे थे तो आसमान से बूँदें बरस रही थीं। अब तय सिर्फ ये होना है कि ये बूँदें आने वाले बेहतर समय के आशीष के रूप में उन पर बरस रही थीं या उस ख़्वाब के टूट जाने का मातम मना रही थीं जो इस देश के आम आदमी ने देखा था।

आठ दिसंबर से अब तक के इन 68 दिनों में दिल्ली और देश की राजनीति ने कई उतार-चढ़ाव देखे। 28 विधायकों की विजय की ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ देश ने एक नई सुबह देखी। जात-पाँत के बंधन तोड़ते हुए महज डेढ़ साल पहले आंदोलन की कोख से उपजी एक पार्टी ने वो कर दिखाया जिसकी शायद ख़ुद उन्हें उम्मीद नहीं थी। बदलाव की जो तीव्र छटपटाहट जनता के मन में थी अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी सीधे उस अकुलाहट से जुड़ गई। नतीज़ा सामने था।

Jamamasjid in Amroha
This great mosque of Amroha is the largest in India, with a courtyard capable of holding 25,000 devotees. It was begun in 1644 and ended up being the final architectural extravagance of Mughal.
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J.S.P.G. College.. Naway Abbasi Girs Degree College Hasmi Girls Law College
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केजरीवाल
सरकार ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरव
 
 
 
 
 
 
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