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Friday 22nd 2019 March
 

यौम ए वफात पर एक ताजियती निशस्त

News Date :

10.Feb.2019

Repoter Name :

Nadeem Ahmed Siddiqui

News Detail:

अमरोहा। उर्दू हिन्दी के मशहूर शायर मुक्तदा हसन निदा फाजली के यौम ए वफात पर एक ताजियती निशस्त का आयोजन बज्म ए जिन्दा दिलान ए अमरोहा के तत्वाधान में अलीजान मन्जिल में किया गया। अध्यक्षता मास्टर मुनीम रिजवी तथा संचालन युवा शायर सैय्यद शिबान कादरी ने किया। मुख्य अतिथि के तौर पर इस्लामाबाद पाकिस्तान से तशरीफ लाए मसूद जुबैरी सम्मिलित हुए। नात ए पाक का नजराना नासिर अमरोहवी ने पेश किया। उर्दू हिन्दी शायरी से जुड़े लोगों के अतिरिक्त नगर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।युवा शायर व साहित्यकार डॉ. नासिर अमरोहवी ने कहा कि निदा फाजली हमारे समाज की एक अछूती आवाज हैं, उन्होंने उर्दू के साथ साथ हिन्दी शायरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फिल्मी गीतकार के साथ संवाद लेखक भी थे। निदा फाजली ने अपनी शायरी के जरिए आम इन्सान के जज्बात को छुआ है। उनकी भाषा आसान व सब की समझ में आने वाली है। उन्होंने आम इन्सान की भाषा में आम इन्सान से बात की है और अपनी शायरी के द्वारा उसके दिल पर दस्तक दी है। शिबान कादरी ने कहा कि निदा फाजली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को ग्वालियर के एक अदबी खानदान में हुआ, उनके पिता स्वयं एक शायर थे। निदा फाजली ने अपनी शायरी के आरम्भिक समय में सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास और बाबा फरीद को पढ़ा और बहुत प्रभावित हुए। 1947 के बाद उनके माता पिता पाकिस्तान चले गए लेकिन निदा फाजली ने अपने देश भारत में ही रहना पसन्द किया। काम काज की तलाश में देश के विभिन्न शहरों में फिरे और फिर माया नगरी मुम्बई पहुंचे। मुम्बई में कई पत्रिकाओं का संपादन किया और फिर फिल्म जगत से जुड़ कर गीत लेखन तथा संवाद लेखन का कार्य करते रहे। उनका देहान्त 8 फरवरी 2016 को मुम्बई में हुआ। पाकिस्तान से तशरीफ लाए मसूद जुबैरी ने कहा कि जब निदा फाजली पाकिस्तान एक मुशायरे के लिए गए तो कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके मशहूर शेर पर ऐतराज किया। घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए। लोगों ने पूछा, क्या आप किसी रोते हुए बच्चे को खुदा से बड़ा समझते हैं? निदा ने जवाब दिया कि मस्जिद तो हम सब मिलकर अपने हाथों से बनाते हैं जबकि बच्चों को खुदा अपने हाथ से बनाता है। उन्होंने कहा कि निदा फाजली से मुहब्बत करने वालों की पाकिस्तान में भी एक बड़ी संख्या है। साहित्य और काव्य मानव द्वारा खींची गई सरहदों में कैद नहीं रह सकते।ओवैस रिजवी ने कहा कि निदा फाजली एक कामयाब गीतकार हैं, उनके लिखे गीत बहुत पसंद किए गए और उन पर अवार्ड्स भी दिए गए। होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है, कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, आ भी जा, आ भी जा वगैरह उनके बहुत मशहूर गीत हैं जिन्हें न केवल फिल्मी दुनिया में सराहा गया बल्कि इन गीतों की वजह से उनकी एक अलग पहचान भी बनी।निदा फाजली को देश के नामचीन साहित्य संस्थानों ने सम्मान दे कर उर्दू हिन्दी शायरी में उनके योगदान को सराहा है। निदा फाजली आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी शायरी हमेशा उनके हमारे बीच होने का अहसास दिलाती रहेगी। जीशान अहमद एडवोकेट ,दाऊद रिजवी, रहबर रिजवी, ईमान हसन, आदि काफी लोग मौजूद रहे।
 
 
 
 
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