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Monday 16th 2019 December
 

जश्ने ईद ए मीलादुन्नबी

News Date :

13.11.2019

Repoter Name :

Nadeem Ahmed

News Detail:

अमरोहा। मुस्लिम कमेटी अमरोहा के तत्वाधान में जश्ने ईद ए मीलादुन्नबी सल्लव की 17दिवसीय तकरीबात का 14वाँ प्रोग्राम ’जलसा ए सीरते पाक’मोहल्ला सराय कोहना सैयद जायर हुसैन चैक में आयोजित हुआ। सदारत मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी व निजामत हाजी खुरशीद अनवर ने की। आगाज हाफिज शमीम ने कुरआन मजीद की तिलावत से किया। जुबैर इब्ने सैफी, हाफिज अफ्फान जैदी, शमीम अमरोहवी ने नाते नबी का नजराना पेश किया। जमीयत उलेमा ए हिंद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का पूरा जीवन मानवता की सेवा में गुजरा। जब हजरत साहब का जन्म हुआ, उस समय अरब देश की सामाजिक स्थिति बहुत खराब थी। महिलाओं का कोई सम्मान नहीं था। लोग अपनी पुत्रियों को जिंदा दफन कर देते थे। कबीलों के लोग आपस में लड़ते रहते थे, जिसमें हजारों लोग जान से हाथ धो बैठते। लोग शराब और जुए के आदी हो चुके थे। आपसी भाईचारा और प्यार-मोहब्बत खत्म हो चुके थे। इन बुराइयों के खिलाफ बाद में हजरत साहब ने पहल की थी। जन्म के पहले ही हजरत साहब के पिता का निधन हो गया था और छह साल की उम्र में उनकी मां भी नहीं रहीं। उनका लालन-पालन उनके चचा हजरत अबू तालिब ने किया। हजरत साहब ने पूरी जिंदगी मानवता की सेवा की। अरब की बिगड़ती हुई सामाजिक दशा को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने अपने से 15 साल बड़ी विधवा महिला हजरत खदीजा से शादी की। उस समय यह बड़ी प्रगतिशीलता की बात थी, क्योंकि तब विधवा महिलाओं की समाज में इज्जत नहीं थी। इससे समाज में संदेश गया कि विधवा स्त्री को भी पूरा सम्मान देना चाहिए। हजरत मोहम्मद ने महिलाओं पर हो रहे जुल्म को रोका और महिलाओं को समाज में इज्जत की जिंदगी मिली।मोहम्मद साहब ने लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। मौलाना ने आगे कहा कि अल्लाह रब्बुल इज्जत ने फरमाया है कि सुस्त न हो और गम न खाओ तुम ही सरबुलन्द (गालिब)रहोगे, अगर तुम मोमिन हो यानि अल्लाह तआला ने मुसलमानों की सरबुलन्दी का वायदा मोमिन ही की शर्त के साथ किया है। मोमिन का मतलब ईमान वाला। हम मुसलमान तभी अल्लाह की नजर में मोमिन हैं जब हम अल्लाह के सिवाय किसी दूसरे से खौफ न रखते हों और न ही अल्लाह के सिवाय किसी दूसरे से कोई उम्मीद रखते हों। अंत में मुल्क में अमन चैन की दुआ की। कन्वीनर हाजी सैयद महबूब हुसैन जैदी ने आभार व्यक्त किया। हाजी अब्दुल कय्यूम राईनी, हाजी अस्लूब हुसैन जैदी, डा. नजमुन्नबि, मन्सूर अहमद एडवोकेट, हाजी ओवैस मुस्तुफा रिजवी, आले नबी, तन्जीम हुसैन, मुराद अली खान, मुराद आरिफ, निराले अंसारी , यासिर अंसारी , इकराम हुसैन जैदी ,हाजी अफजाल अहमद , शहजाद इसहाक मंसूर हुसैन जैदी आदि मौजूद थे ।
 
 
 
 
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