Live Political Video-राजनैतिक वीडियो
AMP Audio Component
"Chalte Chalte Yun Hi Koi" - Mera Karma and Dharma-Song
अमरोहा। नगर के नायाब अब्बासी डिग्री कॉलेज, नफ़ीस अब्बासी (कैलसा रोड) में रविवार को जनपद के पत्रकार एवं स्तम्भकार डॉ. महताब अमरोहवी की पुस्तक ‘फ़न-ए-कलाम निगारी और कुछ मेरे कॉलम’ का विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश अंजुमन तरक़्क़ी के उपाध्यक्ष डॉ. सिराज उद्दीन हाश्मी ने की। कार्यक्रम में पत्रकारिता, सहाफ़त और साहित्य जगत से जुड़ी कई नामवर हस्तियों ने शिरकत की।
कार्यक्रम में मुफ़्ती अफ़्फ़ान मंसूरपुरी साहब ने मौजूदा डिजिटल दौर में पत्रकारिता की बढ़ती जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सहाफ़त का काम केवल यह बताना नहीं है कि क्या हुआ, बल्कि यह समझना भी है कि क्यों हुआ और उसका समाज पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज जब खबरें बहुत तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं, ऐसे में पत्रकार और क़लमकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
मुख्य अतिथि सदर विधायक एवं लोक लेखा समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी महबूब अली ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में आज अनेक कठिनाइयां हैं, लेकिन ऐसे हालात में निष्पक्ष पत्रकारिता और स्तम्भ लेखन अपने आप में साहस का कार्य है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है, इसलिए निष्पक्ष पत्रकारिता के विकास और संरक्षण के लिए आवश्यक है कि डॉ. महताब अमरोहवी जैसी निष्पक्ष लेखन शैली का समर्थन किया जाए।
उन्होंने कहा कि डॉ. महताब अमरोहवी ने अपनी पुस्तक के माध्यम से पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया है। यह पुस्तक भविष्य में पत्रकारिता में पीएचडी, एमफिल और डी.लिट. करने वाले शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि कॉलम समाज का एक खूबसूरत आईना होते हैं और सहाफ़त व क़लम समाज की तस्वीर को सामने लाने का काम करते हैं। उन्होंने डॉ. महताब अमरोहवी को पुस्तक के विमोचन पर मुबारकबाद पेश की।
एमएलसी (शिक्षक) के उम्मीदवार हाजी दानिश अख़्तर की गैर-मौजूदगी में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष निर्मोज यादव उनके प्रतिनिधि के रूप में कार्यक्रम में मौजूद रहे।
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पूर्व विभागाध्यक्ष, उर्दू-फ़ारसी प्रो. नाशिर नक़वी ने कार्यक्रम में अहम और केंद्रीय संबोधन किया तथा पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
डॉ. मिस्बाह अहमद सिद्दीक़ी की गैर-मौजूदगी में उनकी ओर से डॉ. महताब अमरोहवी के नाम भेजा गया संदेश सईद तनवीर हसन ने पढ़कर सुनाया।
इस अवसर पर डॉ. जमशेद कमाल, सैयद महबूब जैदी, डॉ. तारिक़ अज़ीम एडवोकेट और डॉ. नासिर अमरोही समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के सरपरस्त नायाब अब्बासी डिग्री कॉलेज के सदर फ़िरोज़ कमाल अब्बासी विदेश में होने के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके। उनकी ओर से मेहमानों का स्वागत और शुक्रिया अदा किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत उनेसा रमीज़ द्वारा तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जबकि डॉ. मुबारक अमरोहवी ने नात-ए-पाक का नज़राना पेश किया। कार्यक्रम का संचालन सैयद शैबान क़ादरी ने किया।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. तारिक़ अज़ीम एडवोकेट ने कहा कि डॉ. महताब अमरोहवी की किताब का इजरा महज़ एक किताब की रस्म-ए-इजरा नहीं, बल्कि क़लम की ताक़त और उसकी इज़्ज़त व एहतराम का एतराफ़ है।
डॉ. जमशेद कमाल अमरोहवी ने कहा कि कॉलम लिखना दरअसल समाज की उस आवाज़ को आम करना है, जो कहीं दब गई हो या जिसे सुना नहीं जा रहा हो। एक कॉलमनिगार अपनी तहरीर के ज़रिए उन मसाइल और आवाज़ों को सामने लाता है, जिन्हें आम तौर पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
पुस्तक के लेखक डॉ. महताब अमरोहवी ने अपनी किताब के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह पुस्तक लगभग पांच वर्षों की मेहनत का नतीजा है। इसमें खबरों के चयन, उनकी भाषा, किस स्थान पर कौन-सी खबर प्रकाशित की जाए, किसी खबर का समाज के विभिन्न वर्गों पर क्या प्रभाव पड़ता है, संपादकीय पेज पर प्रकाशित होने वाले कॉलम का चयन किस आधार पर किया जाए, उसकी भाषा और विषय क्या हो, उसकी अहमियत तथा रोज़मर्रा के घटनाक्रम से उसके संबंध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है।
उन्होंने बताया कि पुस्तक में पत्रकारिता की विभिन्न तकनीकों और कॉलम लेखन के महत्वपूर्ण पहलुओं को भी विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है।
महबूब हुसैन ज़ैदी ने पुस्तक के विमोचन पर डॉ. महताब अमरोहवी को मुबारकबाद देते हुए इसे पत्रकारिता के लिए महत्वपूर्ण कृति बताया। उन्होंने कहा कि किताब में सहाफ़त और कॉलम निगारी को महज़ लिखने की सलाहियत के तौर पर नहीं, बल्कि एक जिम्मेदाराना क़लमी फ़न के रूप में समझाने की कोशिश की गई है।
अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. सिराज उद्दीन हाश्मी ने पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. महताब अमरोहवी को पुस्तक के विमोचन पर मुबारकबाद पेश की।
अंत में नायाब अब्बासी डिग्री कॉलेज के ज्वाइंट सेक्रेटरी क़सीम अशरफ़ ने कॉलेज के सदर फ़िरोज़ कमाल अब्बासी की ओर से तमाम मेहमानान-ए-ख़ुसूसी, मेहमानों, वक्ताओं, सहाफ़ियों, अदबी शख्सियतों और कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया तथा उनका खैरमकदम किया।
इस अवसर पर कोसर अब्बासी, इक़बाल अहमद खान, अमीर अमरोहवी, आरिफ मुनीर, मोमनीन कुरैशी, मौलाना हनीफ, मोहम्मद अहमद ज़ैदी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
"Chalte Chalte Yun Hi Koi" - Mera Karma and Dharma-Song